छोटी हाइट के वजह से आमिर खान थे इन्स्क्योर

छोटी हाइट के वजह से आमिर खान थे इन्स्क्योर

आमिर खान का जन्म 14 मार्च 1965 को एक फिल्मी परिवार में हुआ, लेकिन उनका बचपन भी आम बच्चों की तरह ही था – सपनों, संघर्षों और असुरक्षाओं से भरा। जैसे-जैसे वह बड़े हुए, उन्होंने यह महसूस किया कि उनकी हाइट दूसरे लड़कों के मुकाबले थोड़ी कम है। यही बात उनके आत्मविश्वास को बार-बार चुनौती देती रही।

स्कूल और कॉलेज के दिनों में आमिर अक्सर खुद की तुलना अपने लंबे दोस्तों या सहपाठियों से करते थे। वह मानते थे कि लड़कों में लंबाई को अक्सर "आदर्श मर्दानगी" से जोड़ा जाता है – और यहीं से उनके मन में एक प्रकार का संकोच (insecurity) जन्म लेने लगा।

फिल्मों में संघर्ष और हाइट का प्रभाव

जब आमिर खान ने फिल्मों में कदम रखा, तो उन्हें शुरुआत में कई बार यह सुनना पड़ा कि उनकी हाइट हीरो के लायक नहीं है। उस समय फिल्म इंडस्ट्री में लंबे कद के अभिनेता जैसे अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, धर्मेंद्र आदि का बोलबाला था।

आमिर ने एक इंटरव्यू में कहा था:

"लोग अक्सर मेरी हाइट को लेकर सवाल उठाते थे। मुझे लगता था कि शायद मैं कभी लीड एक्टर नहीं बन पाऊँगा। मेरी काबिलियत से पहले मेरी हाइट देखी जाती थी।"


फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ (1988) में जब उन्होंने पहली बार मुख्य भूमिका निभाई, तब भी उन्हें इस बात की चिंता थी कि उनकी हीरोइन जूही चावला कहीं उनसे लंबी न लगे। कैमरा एंगल, फुटवियर और फ्रेमिंग के जरिए उनकी हाइट को एडजस्ट किया गया।

कैसे तोड़ा आमिर ने यह भ्रम?

आमिर खान ने अपनी हाइट को कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी सबसे बड़ी ताकत – अभिनय – को सामने रखा। उन्होंने एक के बाद एक चुनौतीपूर्ण किरदार निभाए और यह साबित किया कि अभिनय में कद नहीं, कला मायने रखती है।

चंद उदाहरण:

लगान में एक गांव का क्रिकेट कप्तान – एक प्रेरणादायक नेता।तारे ज़मीन पर में एक संवेदनशील शिक्षक।

गजनी में एक शक्तिशाली और भावुक प्रेमी।

दंगल में एक उम्रदराज, मेहनती पहलवान पिता।

इन सभी फिल्मों में उनकी हाइट कभी कहानी का मुद्दा नहीं बनी, क्योंकि उनके अभिनय ने दर्शकों का ध्यान पूरी तरह से अपने किरदार की गहराई पर खींच लिया।

आज की आमिर की सोच

अब जब आमिर खान इंडस्ट्री के सबसे सफल अभिनेताओं में गिने जाते हैं, तो वह यह खुलकर स्वीकार करते हैं कि उनकी हाइट को लेकर जो इनसिक्योरिटी थी, वह अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है।

उन्होंने एक बार कहा था:

"अगर मैं अपने कद को लेकर ही बैठा रहता, तो शायद मैं कभी 'लगान' या '3 इडियट्स' नहीं कर पाता। आत्मविश्वास भीतर से आता है, कद से नहीं।"

निष्कर्ष:

आमिर खान की कहानी हम सभी के लिए प्रेरणा है। हर इंसान के जीवन में कुछ ऐसी बातें होती हैं जो उसे दूसरों से कमतर महसूस कराती हैं। लेकिन अगर हम खुद पर विश्वास रखें और अपनी योग्यता को पहचानें, तो कोई भी शारीरिक या सामाजिक बाधा हमारे रास्ते का पत्थर नहीं बन सकती।

आमिर ने यह सिखाया है कि 'कद' सिर्फ शरीर का नहीं होता – सोच और हौसलों का भी होता है। और उस ऊंचाई पर पहुंचने के लिए मापदंड सिर्फ दिलेरी, मेहनत और ईमानदारी होनी चाहिए।

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